back dated- 04.10.12

 

जीवन का असीम सम्बल 

जीवन बहुत खूबसूरत यथार्थ है और हमारा खुशनसीब है - हमे समझना चाहिये कि हमे एक अवसर मिलता है खुद को संवारने का.

यह पढ कर पाठक ज़रूर सोचेंगे कि यहाँ पढने वाले लोग तो कम ही होते हैं फिर ऐसे गहन विचार यहाँ प्रस्तुत करने का फायदा क्या है ?

ओन लाइन काफी ज़बरदस्त वाक्या है इंसानी ख्यालो और अभिव्यक्ति के समूह प्रदर्शन का तो ज़ाहिर सी बात है कि जो थोडे बहुत लोग यहाँ लिखे विचार पढते हैं कम से कम, वो एक दो विचार के प्रति तो अपनी सहमति रखते होंगे और उसी से ही यहाँ लिखने का संतोष प्राप्त हो जाता है.

यह भी कटु सत्य है कि अधिकांश लोग जो अपने मापदंडो के साथ ज़िंदगी बिताते है वो तो शायद ओन लाइन लेखन प्रक्रिया के प्रति रुझान भी नही रखते होंगे, बस उम्मीद पर दुनिया कायम है!

तो विचार फिर से जीवन के सौंदर्य पर ही केंद्रित है - 

लेखन एक तरह से जीने का ही पर्याय है, इसके अलावा तो लेखन शैली का कोई उपयोग या सार्थकता समझ नही आती - तो इस विचार को मद्देनज़र रखते हुए यह कहने का मन करता है कि 'फिलोसोफी' क्यो खासी भारी भरकम प्रतीत होती है विषय के रूप मे...

जीवन के बारे मे अभिव्यक्ति से लोग थोडा बोर होते जान पडते हैं, फिर भी इसी उम्म्मीद पर लेख़न जारी रहेगा कि हर इंसान का मुकाम होता तो जीवन सौंदर्य का अर्जन करना ही है.

सुप्रिया आसोपा सक्सेना

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