back dated- 13.09.12

कभी खुशी कभी गम


ये दोनो हमारे जुडवा हैं, या कहे, सिक्के के दो पहलू – सदैव हमारे इर्द-गिर्द और हमारे साथ रहते हैं. हम मे से ज़्यादातर लोग एक दूसरे के हैं और जब एक से ज़्यादा लोग साथ रहते हैं तो यह ही सम्भव है कि खुशी और गम दोनो का वास्ता हमारे साथ, साथ-साथ जुडा रहता है.

क्या यह आसान सी ही बात है? एक जन की खुशी दूजे जन का गम एक होड बन कर रह जाते हैं – बाहरी प्रतिस्पर्धा - आंतरिक कशमकश ... खुशी का पलडा कैसे भारी करे हम ?

सुप्रिया आसोपा सक्सेना



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

backdated 2011-14

back dated- 13.09.12

औपचारिकता और वैचारिक दूषण