back dated - 2011-14
दूरदर्शिता प्रायः सब में होती है.
हम में से कितने लोग होते हैं जो घंटो एकांत में बैठ कर सोचते रहते हैं - ऐसे लोग जो एकांत सिर्फ इसलिए पसंद करते हैं और अकेलापन चुनते हैं क्योंकि उनसे सन्नाटा, खामोशी बातें करती है...
विचार, कल्पना के रूप में या ख्यालों के रूप में आँखों के सामने - बंद या खुली, डोलते हैं, हरकते करते हैं और ऐसे लोगों को एहसास दिलाते हैं कि वे सही हैं, उनके कर्म से और धर्म से, दुनिया माने या नहीं.
उनका एकांत ही इस बात का द्योत्तक होता है कि वे अकेले हैं, बिना समर्थन के.
उनका मनोबल ही उनका शस्त्र होता है और उनकी मानसिकता, उनकी सीख और समझ.
F-100, Profit Centre, Mahaveer Nagar, Kandivali (W), Mumbai-67
सुप्रिया आसोपा सक्सेना
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