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 विचारों का आकर्षक प्रदर्शन - जन संचार


जी हाँ ! जन संचार है विचारों का आकर्षक प्रदर्शन। और यह संभव करते हैं वे सभी लेखक गण जो समझने की चेष्ठा करते हुए समझ ही जाते हैं की जनता जनार्दन को क्या चाहिए।


बेहतरीन तरीके से मुझे भी समझ आ ही गया कि क्या कहूं जो कोई समझना चाहे... कम से कम पढ़े तो सही।

जब तक कोई पाठक जन यह कथन नहीं पढ़ लें तब तक यह भी साबित होना संभव नहीं है कि यहाँ लिखा हुआ सब कुछ पहले नहीं लिखा जा चुका है.


फिर भी आशा यही है कि जो भी यहाँ लिखा है उसके पीछे छुपी हुई भावना को - एक संचार विषय की विद्यार्थी की अभिव्यक्ति समझ कर ग्रहण करें।


संचार काफ़ी अद्भुत कला है, यह बात मुझे पता चली नाटक की प्रयोगशाला में भाग लेकर, कुछ वर्षों पहले. दिग्गज गणों से भेंट हो सकी थी जिन्हें हम प्रायः फिल्मों में या टीवी पर ही देखते हैं और पसंद करते हैं।


नाटक शैली द्वारा संचार एक अद्भुत एवं मुदित कर देने वाली कला है और इसके प्रेक्षक एवं आलोचक काफी दिमाग और विवेक का उपयोग करने वाले लोग होते हैं, पूर्ण आदर सहित कहूंगी - हस्ती होते हैं।


ज़बरदस्त बात विवेक और बुद्धि के ऊपर - ये विवेकी लोग अपने कार्यकौशल और दक्षता की वजह से 'हस्ती' कहलाते हैं, यानि, जन संचार सिर्फ एक कौशल मात्र ही नहीं, एक ऐसी शक्ति है जो एक को अनेकों तक पहुंचाने में सफलता दिलाती है।

आकर्षण को इसमें विशेष महत्त्व दिया जाना चाहिए फिर.


जनता के आकर्षित दिल, दिमाग, दर्शन, हर्ष - मानवीय संतुष्ठी -> सफल जन संचार -> एक सम्पूर्ण उपलब्धि.

F-100, Profit Centre, Mahaveer Nagar, Kandivali (W), Mumbai-67.


सुप्रिया आसोपा सक्सेना

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